भगवान विष्णु

लक्ष्मी-नारायण नाम संयुक्त रूप से हिन्दू भगवान, विष्णु या नारायण और उनकी पत्नी भगवती लक्ष्मी के लिए दम्पति रूप में लिया जाता है।

भगवान विष्णु

हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो भगवान शिव और ब्रह्मा को माना जाता है। जहाँ ब्रह्मा को विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है वहीं शिव को संहारक माना गया है।

भगवान विष्णु

विष्णु की पत्नी लक्ष्मी हैं। विष्णु का निवास क्षीर सागर है। उनका शयन सांप के ऊपर है। उनकी नाभि से कमल उत्पन्न होता है जिसमें ब्रह्मा जी स्थित है। वह अपने नीचे वाले बाएं हाथ में पद्म (कमल) , अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में गदा (कौमोदकी) ,ऊपर वाले बाएं हाथ में शंख (पांच्यजन्य), और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्र(सुदर्शन) धारण करते हैं

भगवान विष्णु

विष्णु के दस मुख्य अवतार मान्यता प्राप्त हैं।

भगवद्गीता

वैष्णव सिद्धांत में विष्णु को सर्वशक्तिमान प्रदर्शित किया गया है बल्कि सूर्य जिनका एक और नाम "सूर्यनारायण" भी है को केवल विष्णु का ही एक स्वरुप माना जाता है।

Saturday, July 9, 2016

मेरे मार्ग पर पैर रखकर तो देख ।


मेरे मार्ग पर पैर रखकर तो देख ।
तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना ।
मेरे लिए खर्च करके तो देख ।
कुबेर के भंडार न खोल दूँ तो कहना ।
मेरे लिए कडवे वचन सुनकर तो देख।
कृपा न बरसे तो कहना ।
मेरी तरफ आ के तो देख ।
तेरा ध्यान न रखूं तो कहना ।
मेरी बातें लोगो से करके तो देख ।
तुझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना..
!! जय श्री कृष्णा राधे - राधे !!

भविष्यवाणी जो आज सच हो रही है


भगवान श्रीकृष्ण द्वारा 5000 सालों पहले की गई भविष्यवाणी जो आज सच हो रही है
कलियुग में, अकेला धन एक आदमी के अच्छे जन्म, उचित व्यवहार, और अच्छे गुणों की निशानी माना जाएगा।और कानून और न्याय केवल एक शक्ति के आधार पर लागू किया जाएगा।
पुरुष और महिला सिर्फ आकर्षण मात्र के कारण एक साथ रहते हैं l एक आदमी सिर्फ अपना एक धागा पहन कर ब्राह्मण के रूप में जाना जाएगा।
पृथ्वी पर बस भ्रष्ट लोगों की आबादी बढ़ेगी और जो लोग खुद को मजबूत दिखायेगे उन्हें राजनीति की ताकत मिलेगी l
मनुष्य कलियुग में अकाल से परेशान रहेगे, लोगों को खाने के पत्ते, जड़, मांस , जंगली शहद , फल, फूल, और बीज का सहारा होगा। सूखे से मारा मनुष्य पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा।
कलियुग में मनुष्य के लिए जीवन की अधिकतम अवधि 50 वर्ष तक होगी l कलियुग में मनुष्य अपने बुजुर्ग माता पिता की सेवा नहीं करेगा l
मनुष्य को ठंड, हवा, गर्मी, बारिश और बर्फ से बहुत नुकसान भुगतना होगा। लोग अपने झगड़े, भूख, प्यास , बीमारी और गंभीर चिंता से परेशान हो जाएगे
!! जय श्री कृष्णा राधे - राधे !!

कुछ कडवे सच प्रभु सुन पाओ तो सुनाऊ?



कुछ कडवे सच प्रभु सुन पाओ तो सुनाऊ?
यमुना के मीठे पानी से जिंदगी शुरू की और समुन्द्र के खारे पानी तक पहुच गए ? एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्रपर भरोसा कर लिया और
दसों उँगलियों पर चलने वाळी बांसुरी को भूल गए ?
कान्हा जब तुम प्रेम से जुड़े थे तो जो ऊँगली गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों को विनाश से बचाती थी प्रेम से अलग होने पर वही ऊँगली
क्या क्या रंग दिखाने लगी ?
सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम आने लगी
कान्हा और द्वारकाधीश में क्या फर्क होता है बताऊँ ?
कान्हा होते तो तुम सुदामा के घर जाते सुदामा तुम्हारे घर नहीं आता
युद्ध में और प्रेम में यही तो फर्क होता है युद्ध में आप मिटाकर जीतते हैं
और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं
कान्हा प्रेम में डूबा हुआ आदमी
दुखी तो रह सकता है
पर किसी को दुःख नहीं देता
आप तो कई कलाओं के स्वामी हो स्वप्न दूर द्रष्टा हो, गीता जैसे ग्रन्थ के दाता हो पर आपने क्या निर्णय किया
अपनी पूरी सेना कौरवों को सौंप दी?
और अपने आपको पांडवों के साथ कर लिया ?
सेना तो आपकी प्रजा थी राजा तो पालाक होता है उसका रक्षक होता है आप जैसा महा ज्ञानी उस रथ को चला रहा था जिस पर बैठा अर्जुन आपकी प्रजा को ही मार रहा था आपनी प्रजा को मरते देख आपमें करूणा नहीं जगी ?
क्यूंकि आप प्रेम से शून्य हो चुके थे
आज भी धरती पर जाकर देखो
अपनी द्वारकाधीश वाळी छवि को
ढूंढते रह जाओगे
हर घर हर मंदिर में
राधा रानी के साथ ही खड़े नजर आओगे
" राधे राधे"

राधा रमण , राधा रमण , राधा रमण में रहो


जिस काम में , जिस नाम में ,जिस धाम में रहो ,
जिस रंग में , जिस ढंग में , जिस संग में रहो
जिस देह में , जिस गेह में , जिस नेह में रहो
जिस राग में , अनुराग में , बैराग में रहो
जिस मान में , सम्मान में , अपमान में रहो
संसार में , परिवार में , घरवार में रहो
जिस हाल में जिस चाल में , जिस डाल में रहो
जिस देश में , परदेश में , स्वदेश में रहो
राधा रमण , राधा रमण , राधा रमण में रहो
॥ जय श्री राधे कृष्णा ॥

जय कृष्ण हरे श्री कृष्ण हरे


जय कृष्ण हरे श्री कृष्ण हरे .
दुखियों के दुख दूर करे जय जय जय कृष्ण हरे ..
जब चारों तरफ़ अंधियारा हो आशा का दूर किनारा हो .
जब कोई ना खेवन हारा हो तब तू ही बेड़ा पार करे .
तू ही बेड़ा पार करे जय जय जय कृष्ण हरे ..
तू चाहे तो सब कुछ कर दे विष को भी अमृत कर दे .
पूरण कर दे उसकी आशा जो भी तेरा ध्यान धरे .
जो भी तेरा ध्यान धरे जय जय जय कृष्ण हरे ..

नटखट कान्हा



मेरे कान्हा जी बड़े नटखट हैं, वे एक बार हमें पकड़ लें तो छोड़ते नहीं हैं चाहे हम कितना भी प्रयत्न कर लें ।
आपको भी कान्हा जी से प्रेम हो जाएगा, एक बार सच्चे मन से उन्हें अपना मान कर तो देखिए ।
आपके बिगड़े काम बनें या ना बनें, परंतु आपका इस जीवन के पश्चात् उद्धार होना निःसंदेह निश्चित है ।
मेरा कान्हा बहुत ही शरारती है, ऊँची ऊँची सीढ़ियों पर चढ़ जाता है और खेल खेल में हमें बुलाता है । एक बार उस सीढ़ी पर पैर रख दिया, फिर कभी आप डगमगाएंगे नहीं ।
पीछे पीछे राधारानी जी, लाडली जी, आ कर हमें और चढ़ने को प्रोत्साहित करती रहती हैं ।
ऊपर सीढ़ियां चढ़ते जाओ और राधे कान्हा से प्रेम बढ़ाते रहो ।
हरे कृष्ण

Monday, March 28, 2016

श्री कृष्ण जी और उनके भक्त की एक निराली कथा


जय श्री कृष्ण
ठाकुर जी और उनके भक्त की एक निराली कथा .......
एक लडकी थी जो कृष्ण जी की अनन्य भक्त थी, बचपन से ही कृष्ण भगवान का भजन करती थी, भक्ति करती थी, भक्ति करते-करते बड़ी हो गई, भगवान की कृपासे उसका विवाह भी श्रीधाम वृंदावन में किसी अच्छे घर में हो गया.
विवाह होकर पहली बार वृंदावन गई, पर नई दुल्हन होने से कही जा न सकी, और मायके चलि गई.
और वो दिन भी आया जब उसका पति उसे लेने उसके मायके आया,
अपने पति के साथ फिर वृंदावन पहुँच गई, पहुँचते पहुँचते उसे शाम हो गई, पति वृंदावन में यमुना किनारे रूककर कहने लगा -
देखो! शाम का समय है में यमुना जी मे स्नान करके अभी आता हूँ,
तुम इस पेड़ के नीचे बैठ जाओ और सामान की देखरेख करना मै थोड़े ही समय में आ जाऊँगा यही सामने ही हूँ, कुछ लगे तो मुझे आवाज देदेना, इतना कहकर पति चला गया और वह लडकी बैठ गई.
अब एक हाथ लंबा घूँघट निकाल रखा है, क्योकि गाँव है,ससुराल है और वही बैठ गई, मन ही मन विचार करने लगी - कि
देखो!ठाकुर जी की कितनी कृपाहै उन्हें मैंने बचपन से भजा और उनकी कृपा से मेरा विवाह भी श्री धाम वृंदावन में हो गया.
मैं इतने वर्षों से ठाकुर जी को मानती हूँ परन्तु अब तक उनसेकोई रिश्ता नहीं जोड़ा?
फिर सोचती है ठाकुर जी की उम्र क्या होगी ?
लगभग १६ वर्ष के होंगे, मेरे पति २० वर्ष केहै उनसे थोड़े से छोटे है, इसलिए मेरे पति के छोटे भाई की तरह हुए, और मेरे देवर की तरह, तो आज से ठाकुर जी मेरे देवर हुए, अब तो ठाकुर जी से नया सम्बन्ध जोड़कर बड़ी प्रसन्न हुई और मन ही मन ठाकुर जी से कहने लगी -
देखो ठाकुर जी ! आज से मै तुम्हारी भाभी और तुम मेरे देवर हो गए, अब वो समय आएगा जब तुम मुझे भाभी-भाभी कहकर पुकारोगे. इतना सोच ही रही थी तभी एक १०- १५ वर्ष का बालक आया और उस लडकी से बोला - भाभी-भाभी !
लडकी अचानक अपने भाव से बाहर आई और सोचने लगी वृंदावन में तो मै नई हूँ ये भाभी कहकर कौन बुला रहा है,
नई थी इसलिए घूँघट उठकर नहीं देखा कि गाँव के किसी बड़े-बूढ़े ने देख लिया तो बड़ी बदनामी होगी.
अब वह बालक बार-बार कहता पर वह उत्तर न देती बालक पास आया और बोला -
भाभी! नेक अपना चेहरा तो देखाय दे,
अब वह सोचने लगी अरे ये बालक तो बड़ी जिद कर रहा है इसलिए कस केघूँघट पकड़कर बैठ गई कि कही घूँघट उठकर देखन ले, लेकिन उस बालक ने जबरजस्ती घूँघट उठकर चेहरा देखा और भाग गया.
थोड़ी देर में उसका पति आ गया, उसनेसारी बात अपने पतिसे कही.
पति नेकहा - तुमने मुझे आवाज क्यों नहीं दी ? लड़की बोली - वह तो इतनेमें भाग ही गया था.
पति बोला - चिंता मत करो, वृंदावन बहुत बड़ा थोड़े ही है ,
कभी किसी गली में खेलता मिल गया तो हड्डी पसली एक कर दूँगा फिर कभी ऐसा नहीं कर सकेगा.
तुम्हे जहाँ भी दिखे, मुझे जरुर बताना.
फिर दोनों घर गए,
कुछ दिन बाद उसकी सास नेअपने बेटे से कहा- बेटा! देख तेरा विवाह हो गया, बहू मायके से भी आ गई,
पर तुम दोनों अभी तक बाँके बिहारी जी केदर्शन के लिए नहीं गए कल जाकर बहू को दर्शन कराकर लाना. अब अगले दिन दोनों पति पत्नी ठाकुर जी के दर्शन केलिए मंदिर जाते है मंदिर में बहुत भीड़ थी,
लड़का कहने लगा -
देखो! तुम स्त्रियों के साथ आगे जाकर दर्शन करो, में भी आता हूँ अब वह आगे गई पर घूंघट नहीं उठाती उसे डर लगता कोई बड़ा बुढा देखेगा तो कहेगा नई बहू घूँघट के बिना घूम रही है.
बहूत देर हो गई पीछे से पति ने आकर कहा -
अरी बाबली ! बिहारी जी सामनेहै, घूँघट काहे नाय खोले,घूँघट नाय खोलेगी तो दर्शन कैसे करेगी,
अब उसने अपना घूँघट उठाया और जो बाँके बिहारी जी की ओर देखातो बाँके बिहारी जी कि जगह वही बालक मुस्कुराता हुआ दिखा तो एकदम से चिल्लाने लगी - सुनिये जल्दी आओ!
जल्दी आओ !
पति पीछेसे भागा- भागा आया बोला क्या हुआ?
लड़की बोली - उस दिन जो मुझे भाभी-भाभी कहकर भागा था वह बालक मिल गया.
पति ने कहा - कहाँ है ,अभी उसे देखता हूँ ?
तो ठाकुर जी की ओर इशारा करके बोली- ये रहा, आपके सामनेही तो है,
उसके पति ने जो देखा तो अवाक रह गया और वही मंदिर में ही अपनी पत्नी के चरणों में गिर पड़ा बोला तुम धन्य हो वास्तव में तुम्हारे ह्रदय में सच्चा भाव ठाकुर जी के प्रति है,
मै इतने वर्षों से वृंदावन मै हूँ मुझे आज तक उनकेदर्शन नहीं हुए और तेरा भाव इतना उच्च है कि बिहारी जी के तुझे दर्शन हुए..................................
भक्त और भगवान् की जय .....